"भगवान बुद्ध की इस कहानी को सुनकर आप अपनी कीमत समझ जायेंगे"
सभी प्यारे सम्मानित साथियों को सूरज कुमार भारती के तरफ़ से नमो बुद्धाय जय भीम साथियों आज की इस सुंदर से ब्लॉग में हम आपको भगवान बुद्ध से जुड़ी कहानी को पढ़ेंगे और अपने जीवन के बदलाव खातिर कुछ शिक्षा ज्ञान प्राप्त करेंगे....🙏🌺💐
....एक बार की बात है एक आदमी महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा उसने बुद्ध से पूछा बुद्ध मुझे यह जीवन क्यों मिला है? इतनी बड़ी दुनिया में मेरी क्या कीमत है? बुद्ध उसकी बात सुनकर मुस्कराए और उसे एक चमकीला पत्थर देते हुए बोलें, जाओ पहले इस पत्थर का मूल्य पता करके आओ पर ध्यान रहें इसे बेचना नहीं है, सिर्फ मूल्य पता करना है।वह आदमी उस पत्थर को लेकर एक आम बेचने वाले आदमी के पास पहुंचा। उसे पत्थर दिखाते हुए बोला इस पत्थर की क्या कीमत होगी आम वाला आदमी पत्थर की चमक को देखकर समझ गया निश्चित कोई यह कीमती पत्थर है , लेकिन वह बनावटी आवाज में बोला देखने में तो यह कुछ ख़ास नहीं लगता पर मैं इसके बदले दस आम दें सकता हूं ।वह आदमी आगे बढ़ गया सामने एक सब्जी वाला था उसने उससे पत्थर का दाम पूछा सब्जी वाला बोला मैं इसके बदले एक बोरी आलू दे सकता हूं आदमी आगे चल पड़ा उसे लगा पत्थर कीमती है,अब सोचा की किसी बड़े जोहरी से इसकी कीमत पता करना चाहिए वह एक जौहरी की दुकान पर पहुंचा और उससे इस पत्थर की कीमत पूछी जौहरी उस पत्थर को देखते ही समझ गया,की यह बेस्किमती रूबी पत्थर है जो बहुत ही किस्मत वालों को मिलती है वह बोला पत्थर मुझे दे दो और मुझसे दस हजार रूपए लें लो उस आदमी को अब तक पत्थर की कीमत का अंदाजा हो गया था। वह बुद्ध के लौटने के लिए मुड़ा जौहरी उसे रोकते हुए बोला अरे रुको तो भाई मैं इसके पच्चास हज़ार दें सकता हूं ,लेकिन वह आदमी फिर भी नही रुका । जौहर किसी भी कीमत पर उस पत्थर को अपने हाथ से नहीं जानें देना चाहता था । वह उछलकर उसके आगे आ गया और हाथ जोड़कर बोला तुम यह पत्थर मुझे दे दो मैं तुम्हें एक लाख रुपए देने को तैयार हूं , लेकिन वह आदमी पीछा छुड़ाकर जाने लगा जौहरी ने पिछे से आवाज़ लगाई यह बेस्किमती है अनमोल है तुम जितने पैसे कहोगे मैं दे दूंगा यह सुनकर वह आदमी हैरान परेशान हो गया। वह बुद्ध के पास पहुंचा और उन्हें पत्थर वापस करते हुए सारी बात कह सुनाई बुद्ध मुस्कराकर बोले आम वाले ने इसकी कीमत दस आम लगाई, आलू वाले ने एक बोरी और जोहरी वाले बताया कि यह अनमोल है ,इस पत्थर के गुण को जिसने जितना समझा उसने उतनी इसकी कीमत लगाई ऐसे ही,"यह जीवन है हर आदमी एक हीरे के समान है दुनिया जीतना उसे पहचान पाती है उसे उतना महत्व देती है लेकिन आदमी और हीरे में यह अंतर है की हीरे को कोई दूसरा तरासता है और उसमें चमक लाता है जबकि आदमी को अपने आप को तरासना पड़ता है और खुद को चमकाना पड़ता है। तुम भी अपने आप को चमकाकर अपनी चमक बिखेरो तुम्हें भी तुम्हारी कीमत बताने वाले मिल ही जाएंगे"
..नमो बुद्धाय जय भीम ☸️🌺💐🙏
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