मन से बड़ा कुछ नहीं धम्म पद गाथा संख्या ।।1।।

 



आप सभी सम्मानित धम्म बंधुओ को नमो बुद्धाय जय भीम..
                     धम्म पद गाथा और कथा
  
मनोपुब्बंगमा धम्मा,मनोसेट्ठा मनोमया।
मनसा चे पदुट्ठेन, भासति वा करोती वा।
ततो नं दुक्खमन्वेति,चक्कं व वहतो पदं।।1।।

अर्थ: मन सभी प्रवृत्तियों का प्रधान है सभी धर्म (अच्छा या बुरा) मन से ही उत्पन्न होते हैं यदि कोई दूषित मन से कोई कर्म करता है तो उसका परिणाम दुख होता है दुख उसका अनुसरण उसी प्रकार करता है जिस प्रकार बैलगाड़ी का पहिया बैल के खुर के निशान का पीछा करता है।

समझिए कहानी के माध्यम से चछुपाल कि कथा

यह गाथा बुद्ध ने श्रावस्ती वन विहार में चछुपाल नामक एक नेत्रहीन भिक्षु के संदर्भ में कही थी। 

एक दिन भिक्खू चक्षु पाल जेतवन विहार में बुद्ध को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने आया। रात्रि में वह ध्यान साधना में लीन टहलता रहा उसके पैरों के निचे कई कीड़े मकोड़े दबकर मर गए। सुबह में कुछ अन्य भिक्षुगण वहां आए और उन्होंने कीड़े मकोड़े को मरा पाया उन्होनें चछुपाल रात्रि बेला में पाप कर्म किया था।  उन्होंने बुद्ध को सूचित किया की किस प्रकार चछुपाल ने रात्रि बेला में पाप कर्म किया था। बुद्ध ने उस भिक्षुओं से पूछा की क्या उन्होंने चक्षुपाल को उन कीड़ों को मारते हुए देखा था। जब उन्होंने नकारात्मक उत्तर दिया। तब बुद्ध भगवान ने उनसे कहा कि जैसे उन्होंने चक्षुपाल को उन कीड़ों मारते हुए नहीं देखा था वैसे ही चक्षुपाल ने भी उन जीवित कीड़ों को नहीं देखा था। इस प्रकार वह निर्दोष है। भिक्षुओं द्वारा पूछे जाने पर की अर्हत होने के बावजूद चक्षुपाल अंधा क्यों था बुद्ध ने यह कथा सुनाई..

अपने एक पूर्व जन्म में चक्षुपाल आंखों का चिकित्सक था। एक बार उसने जानबूझकर एक महिला रोगी को अंधा कर दिया था । उस महिला ने वचन दिया था कि अगर उसकी आंखें ठीक हो जाएंगी तो वह अपने बच्चों के साथ उसकी दासी हो जाएगी और जीवन पर्यंत उसकी गुलामी करेगी। उसकी आंखों का इलाज चलता रहा और आंखें पूर्णतः ठीक भी हो गई। पर इस भय से कि उसे जीवन पर्यंत गुलामी करनी होगी उसने चिकित्सक से झूठ बोल दिया कि उसकी आंखें ठीक नहीं हो रही थी। चिकित्सक को मालूम था कि वह झूठ बोल रही थी। अतः उसने एक ऐसी दवा दे दी जिससे उस स्त्री की आंखों की रोशनी चली गई वह पुनः अंधी हो गई। अपने इस कुकर्म के कारण चक्षुपाल कई जन्मों में एक अंधे व्यक्ति के रूप में पैदा हुआ था।

टिप्पणी: हमारे सभी अनुभवों का सृजन विचार से होता है। अगर हम बुरे विचारों से बोलते हैं या कोई कार्य करते हैं तो उनसे कष्टदायक परिणाम प्राप्त होता है हम जहां कहीं जाते हैं बुरे विचारों के कारण बुरे परिणाम ही पाते हैं। हम अपने दुखों से तब तक मुक्त नहीं हो सकते जब तक हम अपने बुरे विचारों से ग्रस्त हैं।

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