जब कुछ समझ ना आए तो इस साधु की दो बातें याद रखें...
सभी सम्मानित साथियों को एक बार फिर नमो बुद्धाय जय भीम आज के इस ब्लॉग में एक बहुत ही मनमोहक कहानी को आप लोग के समक्ष पेश करने जा राह हूं शेयर जरूर करें।🙏🙏
...किसी गांव में एक साधु रहा करता था। वह जब भी नाचता था तब भी बारिश होती थी इसलिए जब गांव के लोगो को बारिश की ज़रूरत होती थी तब ये लोग इस साधु के पास जाते और उससे अनुरोध करते की वह नाचे और वह जब नाचने लगते तब बारिश ज़रूर होती थी। कुछ दिनों बाद चार लड़के शहर से गांव में घूमने आए जब यह बात उन्हें पता चली के किसी साधु के नाचने बारिश होती है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ शहरी लड़के पढ़ाई लिखाई के घमंड में गांव वालों को चुनौती दे दी की हम भी नाचेंग तो बारिश होगी,। यदि हमारे नाचने से बारिश नही होगी तो साधु के नाचने से भी बारिश नही होगी। अगले दिन सुबह सुबह गांव वाले लड़को को लेकर साधु के कुटिया के पास पहुंचे गांव वालों ने साधु को यह बात बताई फिर एक लड़को ने नाचना शुरू किया आधा दिन बीत गया लड़के थककर बैठ गए पर बादल नही दिखे कुछ देर बाद और लड़को ने सुरु किया और एक घंटे बीतते बीतते वह भी थककर बैठ गए ।अब साधु की बारी थी उसने नाचना शुरू किया एक घंटा बीत गया पर बारिश नही हुई साधु फिर नही रुका वह नाचता ही रहा नाचते नाचते दो घंटे बीत गए पर बारिश नही हुई चार घंटे बीत गए पर बारिश नही हुई लेकिन साधु तो रुकने का नाम नहीं ले रहा था धीरे धीरे शाम ढलने लगी तभी बदलो की गड़गड़ाहट सुनाई दी और थोड़ी देर बाद जोरों की बारिश होने लगीं यह देखकर चारों लड़के दंग रह गए और साधु से पूछा बाबा भला कैसे हमारे नाचने बारिश नही हुई और आपके नाचने से बारिश हो गई साधु ने उत्तर दिया जब मैं नाचता हूं तो "पहली बात तो मैं नाचूंगा तो बारिश को होना ही है पड़ेगा" और "दुसरी बात यह की मैं तब तक नाचूंगा की जब तक बारिश ना हो जाएं" सफलता चाहने वाले में भी यह गुण विद्यमान होता है वे जिस काम को भी करते है उसमे उन्हें सफल होने का पूरा भरोसा होता है और वह तब तक उस काम को करते है जब तक उसमे सफल ना हो जाए इसलिए हमें सफलता करनी है तो इस साधु के तरह ही अपने मंजिल को पर करना होगा।....💐🌺🙏
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