जब भगवान बुद्ध ने बताया धर्म और धम्म में अंतर?

 

आप सभी सम्मानित साथियों को नमो बुद्धाय जय भीम

आज की इस ब्लॉग में हम सब जानेंगे धर्म और धम्म में अंतर... भगवान बुद्ध कहते हैं धर्म में आप ईश्वर के खिलाफ नहीं बोल सकते, धर्म ग्रंथों की अवहेलना नहीं कर सकते, अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं कर सकते। जबकि धम्म तो स्वयं को जांचने परखने और अपनी बुद्धि का प्रयोग करने की शिक्षा है। धर्म कहता है कि तेरा भला करने तथाकथित ईश्वर जैसी कोई ताकत आएगी जबकि धम्म कहता है अप्प दीपो भव: अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो। बुद्ध भी कहते हैं ना मैं मुक्तिदाता हूं ना मैं मोछदाता हूं,मैं सिर्फ मार्ग दिखाने वाला हूं धम्म अर्थात जीवन जीने का सर्वोत्तम मानवतावादी आधार बहुत से लोग मानते होंगे कि धम्म और धर्म एक ही है उनको विश्लेषण करने की जरूरत है। धर्म में जन्म लेना पड़ता है जबकि धम्म में शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती है इसे कोई भी प्राप्त कर सकता है धर्म से असमानता है भेदभाव है ऊंच-नीच है जबकि धम्म में सब एक हैं सब बराबर है कोई भेदभाव नहीं है धम्म एक शिक्षा है एक विज्ञान है जो सबके लिए है धर्म में विभाजन है अधिकार वर्गों में विभाजित है जबकि धम्म में वर्ग हीनता है अधिकार है ज्ञान सभी के लिए है। धर्म में कोई ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता बताता है तो कोई स्वयं को ईश्वर का दूत कहता है कोई अल्लाह का मालिक बताता है। जबकि धम्म की शिक्षा देने वाले ने खुद को ईश्वर का दूत ना बताकर खुद को एक सच्चा मार्ग दिखाने वाला मनुष्य बताया है। तथागत गौतम बुद्ध "बुद्ध का अर्थ बताते हुए कहते हैं बुद्ध एक अवस्था अथवा स्थिति का नाम है एक ऐसी स्थिति जो मानवीय ज्ञान की चरम अवस्था है। जब मनुष्य अपने तर्क और ज्ञान से एक दुर्लभ अवस्था (बोधिसत्व)को प्राप्त कर लेता है । वो बुद्ध कहलाता है बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर को भी बोधिसत्व का दर्जा दिया गया है जो  तथागत गौतम बुद्ध ने अपने ज्ञान के बदौलत किया। अतः वो भी बोधिसत्व हुए। धर्मों में कानून की कठोरता है जबकि धम्म को मानने या ना मानने में आप पूर्णता स्वतंत्र हैं, धम्म आप पर कोई कानून नहीं थोपता है। जबकी धर्म में सब कुछ फिक्स होता है जैसे जो धर्म ग्रंथों में लिखा है वही सत्य है उसका पालन किसी भी कीमत पर आवश्यक है। जबकि धम्म परिस्थितियों के आधार पर मानवहित के लिए परिवर्तन को मानता है यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता है धम्म ज्ञान है इसीलिए इससे तर्क वितर्क और शिक्षा में बढ़ोतरी हो सकती है जबकि धर्म मानव निर्मित कानून है ये जो नीला पीला है वही धर्म है वैज्ञानिक तर्क वितर्क की सफल जीवन का मूल आधार है।

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